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KRISHNA UPADESHA


कहा जाता है कि गीता में जीवन का सार है। यानी जो व्यक्ति इस ग्रंथ को पढ़कर इस पर लिखी गई बातों पर अमल कर लेता है तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है। महाभारत युद्ध के दौरान जब अर्जुन के कदम युद्ध से डगमगाने लगे थे तब भगवान कृष्ण के उपदेशों के द्वारा वे फिर से लक्ष्य प्राप्त करने की और अग्रसर हुए। श्रीमद्भागवत गीता न केवल धर्म का उपदेश देती है, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाती है। व्‍यक्ति के जन्‍म लेने से मृत्‍यु तक और उसके बाद के चक्र को भी श्रीमद्भगवतगीता में विस्‍तार से बताया गया है। अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। यहां जानिए गीता के 8 ऐसे उपदेश, जिसे पढ़कर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाने में सक्षम होंगे…


– गीता में लिखा है क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है। जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाते हैं। जब तर्क नष्ट होते हैें तो व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है।


– व्यक्ति को आत्म मंथन करना चाहिए। आत्म ज्ञान की तलवार से व्यक्ति अपने अंदर के अज्ञान को काट सकता है। जिससे उत्कर्ष की ओर प्राप्त होता है।


– मन पर नियंत्रण करना बेहद आवश्यक है। जो व्यक्ति मन पर नियंत्रण नहीं कर पाते, उनका मन उनके लिए शत्रु का कार्य करता है।


– जो ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, उसी का नजरिया सही है। इससे वह इच्छित फल की प्राप्ति कर सकता है।


– मन चंचल होता है, वह इधर उधर भटकता रहता है। लेकिन अशांत मन को अभ्यास से वश में किया जा सकता है।


– प्रकृति के विपरीत कर्म करने से मनुष्य तनाव युक्त होता है। यही तनाव मनुष्य के विनाश का कारण बनता है। केवल धर्म और कर्म मार्ग पर ही तनाव से मुक्ति मिल सकती है।


– बुद्धिमान व्यक्ति कार्य में निष्क्रियता और निष्क्रियता देखता है। यही उत्तम रूप से कार्य करने का साधन है।


– गीता में भगवान कहते हैं मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे उसके अनुरूप ही फल की प्राप्ति होती है। इसलिए सदकर्मों को महत्व देना चाहिए।

It is said that life is the essence of life in the Gita. That is, a person who reads this book and executes the things written on it, then his life becomes meaningful. During the Mahabharata war, when Arjuna's steps began to waver from the war, he proceeded to achieve the goal again by the teachings of Lord Krishna. The Shrimad Bhagwat Gita not only teaches religion, but also teaches the art of living. The cycle of the person from birth to death and the subsequent cycle is also described in detail in Srimad Bhagavat Gita. Arjuna and Shri Krishna's dialogues are the source of inspiration for the people. Learn here 8 such teachings of Gita, by reading which you will be able to achieve your goal…



- It is written in the Gita that anger causes confusion, confusion deludes the intellect. When the intellect is anxious then the arguments are destroyed. When arguments are destroyed, the person begins to decline.

- One should churn self. With the sword of self-knowledge a person can cut off the ignorance inside him. From which one attains towards Utkarsh.

- Mind control is very important. Those who are unable to control the mind, their mind acts as an enemy for them.

- The wise person who sees knowledge and karma in one form, his viewpoint is right. With this, he can get the desired fruit.

- The mind is fickle, it wanders here and there. But the restless mind can be subdued by practice.

- Human beings are stressed by doing actions contrary to nature. This stress causes the destruction of man. Only on the path of religion and karma can one get rid of stress.

- The wise man sees inaction and inaction in the work. This is the means to work well.

- In the Gita, God says that whatever a person does, he gets the fruit according to it. Therefore, good works should be given importance.

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