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Monday, July 27, 2020

KRISHNA VANI


आप पानी को कितना भी गर्म कर लें लेकिन थोड़ी देर बाद वह अपने मूल स्वभाव में आकर शीतल हो ही जाता हैं।

इसी प्रकार हम कितना भी क्रोध भय और अंशाति में रह ले।
 
                                                                  लेकिन थोड़ी देर बाद-बोध निर्भयता और प्रसन्नता में हमें आना ही होगा।

क्योंकि यही हमारा मूल स्वभाव है।

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