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Saturday, July 25, 2020

KRISHNA VANI


      "संवेदना की गहराई"
      ये 
       "मनुष्यता की उंचाई है ?"
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 अटपटे से लगने वाले इस सवाल का जवाब "हां" है। 
संवेदना में जितनी हमारी गहराई होगी - मनुष्यता में
 उतनी ही ऊँचाई होगी। और संग्रह में जितनी ऊँचाई होगी, मनुष्यता में उतनी ही नीचाई होगी।

      संवेदना और संग्रह जिंदगी की दो दिशाएँ हैं। संवेदना सम्पूर्ण हो तो संग्रह शून्य हो जाता है। और जिनके चित्त संग्रह की लालसा से घिरे रहते हैं, संवेदना वहाँ अपना घर नहीं बसाती।

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